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सावन की पहली सोमवार, काशी विश्वनाथ में उमड़ा आस्था का जनसैलाब, हर-हर महादेव के जयकारों गूंज उठा काशी सहित सभी मंदिर, पूरा शहर शिवभक्ति के रंग में रंगा नजर आया

वाराणसी बनारस /शहर के ऐतिहासिक श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में सुबह तीन बजे से ही पट खुलते ही भक्तों की भीड़ जुट गई। यहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे। वहीं वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर, महा मृत्युंजय मंदिर, ऋणहरेश्वर मंदिर, पंचमुखी महादेव मंदिर सहित गंगा तट पर स्थित बाकी मंदिरो में भी कांवरियों और स्थानीय भक्तों का हुजूम उमड़ पड़ा।

श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया था, और श्रद्धालुओं की कतारें मुख्य सड़क चौक, बुला नाला, मैदागिन होते हुए डाकखाने तक पहुंच गईं थी। वहीं गोदौलिया की तरफ कांवरियो की लंबी लाइन, दशाश्वमेध घाट व जंगमबाडी तक पहुंच गया था। मंगला आरती के बाद से ही जलाभिषेक का सिलसिला शुरू हो गया। और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग की गई थी।

हर प्रमुख मोड़ और मंदिर परिसर में पुलिस बल के साथ सीसीटीवी से निगरानी रखी गई।स्थानीय कमेटियों ने श्रद्धालुओं के लिए पीने के पानी और चिकित्सा की व्यवस्था की। सावन के पहले सोमवार को लेकर रविवार रात से ही दशाश्वमेध गंगा घाट पर श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था।

लाखों श्रद्धालुओं ने उत्तरवाहिनी गंगा में स्नान कर बाबा काशी विश्वनाथ पर जल चढ़ाया। कई श्रद्धालुओं की टोली ने स्टील के बड़े गगरे में गंगा जल भरकर समूह में बाबा श्री काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर जाकर इष्टदेव को गंगाजल चढ़ाया।

वहीं सुबह से ही शिवालयों के बाहर लगी पूजन सामग्री की दुकानों पर भारी भीड़ रही। भक्तों ने बाबा भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए गंगाजल, बेलपत्र, भांग, धतूरा, गाय का दूध, अक्षत, चंदन और मदार के फूल चढ़ाए। कांवरियों और भक्तों के गेरुआ और पीले वस्त्रों के साथ हर हर महादेव के जयकारों से गूंज उठा काशी पूरा शहर शिवमय नजर आया आज भी मान्यता है कि काशी से कोई भी लोग खाली हाथ नहीं जाते हैं इसलिए बाबा काशी विश्वनाथ का दर्शन करने के लिए श्रद्धालु यहां आते हैं और बाबा काशी विश्वनाथ का दर्शन कर के जाते हैं