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बिलासपुर: बिल्हा उप पंजीयक सियाराम साहू पर 20 हजार रिश्वत लेने और राजस्व क्षति का गंभीर आरोप, EOW महानिदेशक से की गई शिकायत
जिला पंजीयक बिलासपुर की कार्यप्रणाली पर भी उठे सवाल, बिना सुनवाई प्रकरण बंद करने का आरोप।

बिलासपुर,बिल्हा छत्तीसगढ़:बिलासपुर जिले के बिल्हा उप पंजीयक सियाराम साहू एक बार फिर गंभीर विवादों में घिर गए हैं। जमीन पंजीयन में गड़बड़ी, शासन को राजस्व का भारी नुकसान पहुँचाने, नियमों के दोहरे मापदंड अपनाने और 20,000 रुपये की रिश्वत मांगने के गंभीर आरोपों के तहत EOW (आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो) रायपुर के महानिदेशक के समक्षलिखित शिकायत दर्ज कराई गई है। यह शिकायत बिल्हा निवासी नीरज रेलवानी द्वारा की गई है, जिसमें निष्पक्ष जांच और सख्त वैधानिक कार्रवाई की मांग की गई है।
शिकायत के मुख्य बिंदु और गंभीर आरोप:

पंजीयन में अनियमितता और छूट का गलत इस्तेमाल: शिकायत के अनुसार, 24 अगस्त 2026 को बिल्हा तहसील के खसरा नंबर 323/1, 323/2 और 323/20 की भूमि का पंजीयन कराया गया था। आरोप है कि उप पंजीयक द्वारा यह कहकर 20% छूट देने से इनकार कर दिया गया कि यहाँ इसका प्रावधान नहीं है। जबकि इससे पहले नगर पंचायत बिल्हा और नगर पालिका बोदरी क्षेत्र के कई अन्य पंजीयनों में यह छूट दिए जाने के मामले सामने आए हैं।

20,000 रुपये रिश्वत मांगने का आरोप: शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि भूमि पंजीयन के एवज में उप पंजीयक द्वारा सीधे तौर पर 20,000 रुपये की रिश्वत की मांग की गई। राशि न देने पर ही 20 प्रतिशत की छूट का लाभ देने से इंकार किए जाने की बात कही गई।
शासन के संभावित राजस्व की भारी क्षति: मामले में यह आशंका भी जताई गई है कि यदि नियमों के विरुद्ध जाकर कुछ मामलों में छूट दी गई है या पक्षपात किया गया है, तो इससे शासन को भारी राजस्व का नुकसान हुआ है। एनजीडीआरएस (NGDRS) पोर्टल के रिकॉर्ड, स्टाम्प शुल्क और पंजीयन शुल्क की सूक्ष्म और उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है।

जिला पंजीयक की भूमिका और मनमानी पर सवाल: शिकायत में जिला पंजीयक, बिलासपुर की कार्यप्रणाली को भी संदेहास्पद बताया गया है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायत और जिला पंजीयक के समक्ष अपील करने के बावजूद, बिना उचित सुनवाई के प्रकरण को मनमाने ढंग से नसीबीबद्ध (बंद) कर दिया गया। हैरानी की बात यह है कि 8 अक्टूबर 2026 को होने वाली सुनवाई को पहले ही 30 सितंबर 2026 को नस्तीकृत कर दिया गया, जिससे पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
शिकायतकर्ता की प्रमुख मांगें:
पूरे प्रकरण की EOW या किसी निष्पक्ष एजेंसी से स्वतंत्र जांच कराई जाए। एनजीडीआरएस पोर्टल और अन्य संबंधित पंजीयन अभिलेखों की तकनीकी व वित्तीय पड़ताल हो। यदि जांच में भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग और राजस्व क्षति के प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित उप पंजीयक और जिला पंजीयक के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।