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बिजली की बढ़ती कीमतों और स्मार्ट मीटर के खिलाफ कांग्रेस का पूरे प्रदेश में चरणबद्ध आंदोलन का बड़ा ऐलान..2 अगस्त से घर-घर पहुंचकर भरवाए जाएंगे शिकायत फार्म

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में बिजली का मुद्दा अब सिर्फ उपभोक्ताओं की परेशानी नहीं, बल्कि सियासत का सबसे बड़ा हथियार बनता जा रहा है। बढ़ती बिजली दरों, स्मार्ट मीटर और बंद पड़ी 400 यूनिट तक बिजली बिल हाफ योजना को लेकर प्रदेश कांग्रेस ने भाजपा सरकार के खिलाफ राज्यव्यापी आंदोलन का ऐलान कर दिया है। कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि यह आंदोलन केवल विरोध प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि गांव-गांव और शहर-शहर जनता को जोड़कर सरकार पर दबाव बनाया जाएगा।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने शनिवार को पत्रकार वार्ता में घोषणा की कि 1 अगस्त से चार चरणों में प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू होगा। पहले जिला मुख्यालयों में विरोध प्रदर्शन और प्रेस वार्ता होगी, फिर घर-घर जाकर स्मार्ट मीटर के खिलाफ आवेदन भरवाए जाएंगे और हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा। इसके बाद बिजली विभाग के कार्यालयों का घेराव किया जाएगा और अंत में मुख्यमंत्री निवास का घेराव कर सरकार को घेरा जाएगा।
कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार बनने के बाद बिजली उपभोक्ताओं की मुश्किलें लगातार बढ़ी हैं। पार्टी के अनुसार घरेलू उपभोक्ताओं के लिए प्रति यूनिट 30 से 50 पैसे और गैर-घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 20 से 40 पैसे तक बिजली महंगी की गई है। कृषि पंपों पर भी बिजली दरों में बढ़ोतरी हुई है। कांग्रेस का दावा है कि भाजपा सरकार अब तक पांच बार बिजली की दरें बढ़ा चुकी है, जिसका सीधा असर आम और मध्यमवर्गीय परिवारों की जेब पर पड़ा है।

कांगेस पार्टी का कहना है कि प्रदेश के कई उपभोक्ताओं को पहले की तुलना में तीन से चार गुना तक अधिक बिजली बिल मिल रहे हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर लगाने के बाद उपभोक्ताओं की जानकारी और सहमति के बिना उनका अनुबंध भार (लोड) बढ़ाया जा रहा है, जिससे अतिरिक्त शुल्क वसूला जा रहा है।

कांग्रेस ने बढ़े हुए बिजली बिलों के पीछे तीन प्रमुख कारण बताए हैं— लगातार बढ़ती बिजली दरें, 400 यूनिट तक बिजली बिल हाफ योजना का बंद होना, और स्मार्ट मीटर के कारण कथित रूप से अधिक रीडिंग दर्ज होना। कांगेस पार्टी ने आरोप लगाया कि बिजली विभाग उपभोक्ताओं से “बिल के नाम पर वसूली” कर रहा है और स्मार्ट मीटर आम लोगों के लिए राहत नहीं बल्कि परेशानी का कारण बन गए हैं।
स्मार्ट मीटर को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार का भी हवाला दिया। पार्टी का कहना है कि केंद्रीय ऊर्जा मंत्री ने संसद में स्पष्ट किया था कि स्मार्ट मीटर उपभोक्ता की सहमति के बिना अनिवार्य रूप से नहीं लगाए जा सकते। ऐसे में सवाल यह है कि यदि यह व्यवस्था स्वैच्छिक है तो छत्तीसगढ़ में इसे अनिवार्य रूप से लागू करने की कोशिश क्यों की जा रही है?

कांग्रेस ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं— बिजली की बढ़ी हुई दरें तत्काल वापस ली जाएं, 400 यूनिट तक बिजली बिल हाफ योजना दोबारा लागू की जाए और स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया वापस ली जाए। पार्टी का यह भी दावा है कि देश के कुछ राज्यों में स्मार्ट मीटर को लेकर फैसलों में बदलाव किया गया है, इसलिए छत्तीसगढ़ सरकार को भी जनहित में इस नीति पर पुनर्विचार करना चाहिए।
बिजली हमेशा से जनता की रोजमर्रा की जरूरत और जेब से जुड़ा सबसे संवेदनशील मुद्दा रहा है। ऐसे में कांग्रेस का यह आंदोलन आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति को नई दिशा दे सकता है। हालांकि कांग्रेस के आरोपों पर सरकार का पक्ष सामने आना अभी बाकी है। यदि सरकार बढ़ती बिजली दरों, स्मार्ट मीटर और बिलों को लेकर जनता की चिंताओं का संतोषजनक जवाब नहीं देती, तो यह मुद्दा सड़कों से लेकर विधानसभा तक बड़ा राजनीतिक संघर्ष बन सकता है। फिलहाल इतना तय है कि छत्तीसगढ़ में बिजली अब केवल ऊर्जा का नहीं, बल्कि सियासी ऊर्जा का भी सबसे बड़ा मुद्दा बन चुकी है।

शहर और ग्रामीण जिला अध्यक्ष ने सयुक्त रुप से,सुंधाशु मिश्रा और महेंद्र गंगोत्री ने कहा कि सरकार ने बिना व्यापक जनसुनवाई के स्मार्ट मीटर लागू कर दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि जिन लोगों के पास एंड्रॉयड मोबाइल नहीं है, वे डिजिटल माध्यम से बिजली बिल कैसे प्राप्त करेंगे। उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटर से बड़ी संख्या में उपभोक्ता परेशान हैं और कांग्रेस उनके अधिकारों की लड़ाई लड़ेगी।

कांग्रेस के अनुसार 2 अगस्त से कार्यकर्ता घर-घर जाकर प्रभावित उपभोक्ताओं से संपर्क करेंगे, उनकी शिकायतें दर्ज करेंगे और आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाएंगे। प्रेसवार्ता में शैलेश पांडे, विजय केसरवानी, विजय पांडे हरमेंद्र शुक्ला, डॉ.राहुल सिंह ठाकुर सहित कई वरिष्ठ कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।