कई वर्षों का संघर्ष, फिर भी बिलासपुर में हवाई सुविधाएं अधूरी! निकला उल्टा मार्च..बिलासपुर एयरपोर्ट को 4Cश्रेणी  कि मांग..

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कई वर्षों का संघर्ष, फिर भी बिलासपुर में हवाई सुविधाएं अधूरी! निकला उल्टा मार्च..बिलासपुर एयरपोर्ट को 4Cश्रेणी  कि मांग..

बिलासपुर / छत्तीसगढ़ के दूसरे सबसे बड़े शहर और न्यायधानी बिलासपुर में हवाई सुविधा विस्तार की मांग को लेकर चल रहे जन आंदोलन को आज 7 वर्ष पूरे हो गए हैं। इस सातवीं वर्षगांठ पर ‘हवाई सुविधा जन संघर्ष समिति’ के बैनर तले नागरिकों ने अनोखा विरोध प्रदर्शन करते हुए ‘उल्टा मार्च’ निकाला। समिति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन भेजकर बिलासपुर एयरपोर्ट को 4C श्रेणी में अपग्रेड करने के लिए 300 करोड़ रुपये के विशेष अनुदान की मांग की है।
प्रमुख शहर होने के बावजूद उपेक्षित है बिलासपुर



समिति ने प्रधानमंत्री को भेजे गए ज्ञापन में इस बात पर जोर दिया है कि बिलासपुर छत्तीसगढ़ का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण शहर है, जो कई अहम संस्थानों का केंद्र है।यहाँ छत्तीसगढ़ राज्य का हाईकोर्ट स्थित है।दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे जोन (SECR) और दक्षिण पूर्व कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) का मुख्यालय यहीं है।यहाँ केंद्रीय विश्वविद्यालय और प्रधानमंत्री निधि से निर्मित सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल भी संचालित हो रहा है। इतने महत्वपूर्ण संस्थान होने के बावजूद बिलासपुर आज भी बड़ी हवाई सेवाओं से वंचित है।
वर्तमान स्थिति और मांग



वर्तमान में छत्तीसगढ़ में केवल रायपुर का एयरपोर्ट ही 4C श्रेणी का है, जहाँ बोइंग और एयरबस जैसे बड़े विमान संचालित होते हैं। बिलासपुर में 4C एयरपोर्ट और देश के चारों महानगरों के लिए सीधी उड़ान की मांग को लेकर पिछले 7 वर्षों से जन आंदोलन चल रहा है। आंदोलन के दबाव में राज्य सरकार ने यहाँ 3C श्रेणी का छोटा एयरपोर्ट तो बना दिया, जहाँ केवल एटीआर (ATR) विमान चलते हैं, लेकिन इसमें भी सुविधाएँ और उड़ानों की संख्या अत्यंत न्यून हैं।
समिति ने बताया कि देश के नागरिक उड्डयन क्षेत्र में 90% विमान बोइंग और एयरबस हैं। बिलासपुर एयरपोर्ट के विकास के लिए निम्नलिखित कार्यों हेतु लगभग 300 करोड़ रुपये की आवश्यकता है:



रनवे का विस्तार: 1500 मीटर से बढ़ाकर 2800 मीटर करना (जिसके लिए पर्याप्त भूमि उपलब्ध है), स्थाई एटीसी टावर का निर्माण एवं एक नए टर्मिनल भवन का निर्माण कराया जाना आवश्यक है, जिसके लिए 300 करोड़ रुपये की आवश्यकता है, जिसके लिए प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर आंदोलनकारियों ने 300 करोड़ रुपए का अनुदान मांगा है।
300 करोड़ रूपये के विशेष अनुदान की दरकार
समिति ने बताया कि देश के नागरिक उड्डयन क्षेत्र में 90% विमान बोइंग और एयरबस हैं। बिलासपुर एयरपोर्ट के विकास के लिए निम्नलिखित कार्यों हेतु लगभग 300 करोड़ रुपये की आवश्यकता है:



रनवे का विस्तार: 1500 मीटर से बढ़ाकर 2800 मीटर करना (जिसके लिए पर्याप्त भूमि उपलब्ध है), स्थाई एटीसी टावर का निर्माण एवं एक नए टर्मिनल भवन का निर्माण कराया जाना आवश्यक है, जिसके लिए 300 करोड़ रुपये की आवश्यकता है, जिसके लिए प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर आंदोलनकारियों ने 300 करोड़ रुपए का अनुदान मांगा है।



समिति का आरोप है कि कोयले की रॉयल्टी, ऊर्जा संस्थानों और रेलवे के सर्वाधिक लदान (फ्रेट) से केंद्र और राज्य दोनों सरकारों को बिलासपुर संभाग से भारी राजस्व प्राप्त होता है, इसके बावजूद नागरिक उड्डयन मंत्रालय इस एयरपोर्ट के विकास के लिए विशेष अनुदान नहीं दे रहा है और उड़ान योजना के तहत केवल मामूली सहायता मिल रही है।



सातवीं वर्षगांठ पर आयोजित ‘उल्टा मार्च’ के जरिए नागरिकों ने अत्यंत दुखी हृदय से अपना प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराया है। समिति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की है कि वे इस प्रकरण में व्यक्तिगत हस्तक्षेप करें और या तो केंद्र सरकार से 300 करोड़ रुपये का विशेष अनुदान स्वीकृत कराएं, अथवा छत्तीसगढ़ राज्य सरकार को निर्देशित करें कि वे समयबद्ध सीमा (2 वर्ष के भीतर) के अंदर बिलासपुर एयरपोर्ट को 4C श्रेणी में अपग्रेड करने की कार्रवाई पूरी करें।

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