डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 57 लाख की लूट करने वाले,अंतर्राज्यीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश.. एक आरोपी गिरफ्तार ..

One bharat national news

बिलासपुर…डिजिटल अरेस्ट के नाम पर देशभर में लोगों को डराकर ठगी करने वाले अंतर्राज्यीय साइबर गिरोह पर बिलासपुर रेंज साइबर थाना ने बड़ी चोट की है। मनी लॉन्ड्रिंग और ड्रग पार्सल जैसे फर्जी मामलों में फंसाने का डर दिखाकर 57 लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी करने वाले एक शातिर आरोपी को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया है। यह कार्रवाई बिलासपुर रेंज में साइबर अपराध के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और निर्णायक सफलताओं में गिनी जा रही है।



मामला थाना सिविल लाइन, बिलासपुर से रेंज साइबर थाना को जांच के लिए प्राप्त अपराध से जुड़ा है।  जिसमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 309 और आईटी एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया गया था। पीड़ित को वर्चुअल मोबाइल नंबर और फर्जी सिम के जरिए कॉल कर यह झांसा दिया गया कि वह मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसा हुआ है । उसे “डिजिटल अरेस्ट” किया जा सकता है। डर और दबाव बनाकर आरोपी ने अलग-अलग खातों में कुल 57 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए।

जांच के दौरान साइबर थाना टीम ने साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल, बैंक ट्रांजेक्शन डिटेल, फर्जी खातों की जानकारी और तकनीकी इनपुट खंगाले। जांच में सामने आया कि ठगी की रकम फर्जी बैंक खातों के जरिए निकाली जा रही थी और बाद में सोशल मीडिया पर चलने वाले “लेगेसी लोन” नामक ऐप के माध्यम से रकम को लोन के रूप में घुमा कर सफेद किया जा रहा था।



तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि गिरोह का नेटवर्क दिल्ली और उत्तर प्रदेश तक फैला हुआ है। इसके बाद पुलिस महानिरीक्षक रेंज बिलासपुर डॉ. संजीव शुक्ला और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह के निर्देश पर निरीक्षक गोपाल सतपथी के नेतृत्व में एक विशेष टीम दिल्ली रवाना की गई। लगातार तीन दिनों की निगरानी और पतासाजी के बाद शिकारपुर बुलंदशहर और दिल्ली कनेक्शन का खुलासा हुआ।

पुलिस ने आरोपी मनिंदर सिंह निवासी शांति नगर, नार्थ वेस्ट दिल्ली स्थायी पता शिकारपुर, बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश को स्थानीय पुलिस के सहयोग से तलब कर पूछताछ हुई। उसने अपने साथियों के साथ मिलकर डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी करने की बात स्वीकार की। आरोपी ने कबूल किया कि वह कमीशन के लालच में अपनी कंपनी शिकारपुरिहा रियलिटी प्राइवेट लिमिटेड. के नाम से जारी करंट अकाउंट का इस्तेमाल ठगी की रकम मंगाने और निकालने में करता था।

पूछताछ में यह भी सामने आया कि आरोपी फर्जी सिम कार्ड, वर्चुअल मोबाइल नंबर और फर्जी बैंक खातों का इस्तेमाल कर लोगों को मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग पार्सल और अंतरराष्ट्रीय केस में फंसाने का डर दिखाता था। इसके बाद रकम को अलग-अलग चैनलों से घुमाकर निकाल लिया जाता था।

पूरी कार्रवाई में उप पुलिस अधीक्षक निमितेश सिंह के मार्गदर्शन में प्रभारी रेंज साइबर थाना निरीक्षक गोपाल सतपथी के नेतृत्व में एएसआई अरविंद सिंह, जीवन साहू, प्रधान आरक्षक सैयद साजिद, आरक्षक चिरंजीव कुमार सहित साइबर थाना स्टाफ की भूमिका सराहनीय रही।
फिलहाल आरोपी से पूछताछ जारी है और पुलिस को आशंका है कि इस गिरोह से जुड़े और भी बड़े नाम तथा खातों का खुलासा आने वाले दिनों में हो सकता है।

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