स्कूल बसों की सघन जांच केदौरान ..233 में से 93 बसें मिलीं अनफिट…

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राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के अंतर्गत स्कूल बसों की सघन मैकेनिकल जांच और बस स्टाफ के लिए स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। इस दौरान स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर कई गंभीर खामियां उजागर हुई हैं। जांच के दौरान 140 स्कूल बसें निर्धारित मापदंडों पर सही पाई गईं, जबकि 93 बसों में विभिन्न कमियां सामने आईं। इनमें 18 बसें बिना प्रदूषण प्रमाणपत्र, 37 बिना अग्निशमन यंत्र, 12 में बीमा/ड्राइविंग लाइसेंस संबंधी कमी, 2 बिना बीमा, 1 बिना फिटनेस, 3 बिना टैक्स, 10 बिना प्राथमिक उपचार पेटी, 3 बिना सीसीटीवी, 5 बसों के विंड ग्लास टूटे हुए तथा 2 बसें बिना सुरक्षा जाली के पाई गईं। सभी बस संचालकों को तीन दिवस के भीतर कमियां दूर करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसी शिविर के दौरान बस संचालकों, ड्राइवरों, कंडक्टरों एवं स्टाफ का स्वास्थ्य एवं नेत्र परीक्षण भी कराया गया। कुल 233 चालकों एवं स्टाफ के स्वास्थ्य परीक्षण में 26 शुगर, 21 बीपी तथा 9 चर्म रोग से पीड़ित पाए गए। उन्हें शीघ्र चिकित्सकीय परामर्श लेकर नियमित उपचार कराने की हिदायत दी गई।
यातायात पुलिस अधिकारियों ने बस संचालकों को निर्देशित किया कि वे माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुसार ही स्कूल बसों का संचालन करें। मानकों का पालन नहीं करने पर मोटर व्हीकल अधिनियम के तहत कार्रवाई, वाहन को ब्लैकलिस्ट करने एवं परमिट निरस्त करने की चेतावनी दी गई है। जिन स्कूलों की बसें जांच शिविर में नहीं लाई गईं, वहां जाकर निरीक्षण कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक यातायात रामगोपाल करियारे, आरटीओ अधिकारी असीम माथुर एवं योगेश्वर प्रसाद टंडन सहित यातायात व परिवहन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी तथा स्व सहायता समूह के सदस्य उपस्थित रहे।
पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया कि विद्यार्थियों की सुरक्षा सर्वोपरि है और इस दिशा में जांच व जागरूकता अभियान लगातार जारी रहेगा।



इस अभियान का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू बस ड्राइवरों और कंडक्टर्स की सेहत से जुड़ा रहा। मैकेनिकल जांच के साथ-साथ स्टाफ के लिए नेत्र और सामान्य स्वास्थ्य परीक्षण शिविर लगाया गया, जिसके परिणाम चिंताजनक रहे। परीक्षण में शामिल 233 कर्मचारियों में से 26 शुगर और 21 उच्च रक्तचाप (BP) से पीड़ित पाए गए, वहीं 9 कर्मचारी चर्म रोग से ग्रसित मिले। चिकित्सा विशेषज्ञों ने इन सभी को तत्काल उपचार और नियमित परामर्श की सलाह दी है।



अभियान के दौरान स्पष्ट किया गया कि यदि बस संचालक उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्धारित मापदंडों की अनदेखी करते हैं, तो उन पर मोटर व्हीकल अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। जो स्कूल अपनी बसों को जांच के लिए निर्धारित स्थल पर नहीं लाए हैं, उनके परिसरों में जाकर आगामी दिनों में औचक निरीक्षण किया जाएगा। इस वृहद आयोजन का मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना और स्कूली बच्चों के सफर को पूरी तरह सुरक्षित बनाना है।स्कूल बसों की सघन जांच, 233 में से 93 बसें मिलीं अनफिट,

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