बिलासपुर में किसान कांग्रेस ने धान खरीदी में बदहाली..अन्य 7 सूत्रीय मांगों को लेकर कलेक्टर को राज्यपाल के नाम सौंपा ज्ञापन..

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बिलासपुर/रायपुर | दिनांक: 27 जनवरी 2026
छत्तीसगढ़ प्रदेश किसान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अभिषेक मिश्रा के निर्देशानुसार, आज प्रदेश के किसानों की विभिन्न समस्याओं को लेकर संगठन ने बिलासपुर में अपनी आवाज बुलंद की। प्रदेश (संगठन) अकील हुसैन के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने बिलासपुर कलेक्टर श्री अग्रवाल से मुलाकात कर प्रदेश में धान खरीदी की बदहाल स्थिति से अवगत कराया और महामहिम राज्यपाल के नाम 7 सूत्रीय मांगों को लेकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा ।

कलेक्टर अग्रवाल ने किसान कांग्रेस की मांगों को गंभीरता से सुना। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि धान खरीदी की समय सीमा बढ़ाने हेतु उचित पहल की जाएगी। साथ ही, उन्होंने स्पष्ट किया कि किसानों के घरों में जाकर धान चेक करने की विवादास्पद प्रक्रिया को बंद किया जाएगा और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी किसान को अपनी उपज बेचने में असुविधा न हो। प्रतिनिधिमंडल में ये रहे शामिल: इस अवसर पर मुख्य रूप से प्रभारी महामंत्री (संगठन) अकील हुसैन, प्रदेश महासचिव  नीरज सोनी,  आशीष सोनी, बिलासपुर शहर जिला अध्यक्ष योगेश यादव, जिला उपाध्यक्ष शेर सिंह कश्यप, जिला महासचिव श्रीमती नंदनी चौरसिया, जिला महासचिव श्री महेंद्र यादव सहित अनेक पदाधिकारी उपस्थित थे।
किसान कांग्रेस की प्रमुख 7 सूत्रीय मांगें:


समय वृद्धि: धान खरीदी की तारीख 28 फरवरी तक बढ़ाई जाए।
धान उठाव: समितियों से 4 दिनों के भीतर धान का उठाव प्रारंभ हो।
एकमुश्त भुगतान: किसानों को 3100 रुपये के हिसाब से तत्काल भुगतान मिले।
लंबित टोकन: बचे हुए किसानों को 7 दिनों में टोकन जारी कर धान खरीदा जाए।
वन पट्टा धारी: वन पट्टा धारक किसानों के लिए विशेष खरीदी व्यवस्था हो।
गिरदावरी का आतंक: गिरदावरी के नाम पर रकबा कटौती और किसानों का उत्पीड़न बंद हो।
सम्मान की रक्षा: घर-घर जाकर धान जांच करने की अपमानजनक प्रक्रिया पर पूर्ण रोक लगे। अकील हुसैन ने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा, आज कलेक्टर महोदय ने हमारी मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाया है। यदि प्रशासन अपने वादे के अनुरूप शीघ्र कार्रवाई नहीं करता है, तो किसान कांग्रेस पूरे प्रदेश में उग्र आंदोलन और चक्काजाम करने के लिए विवश होगी। हम अन्नदाता के स्वाभिमान से कोई समझौता नहीं करेंगे।”
छत्तीसगढ़ प्रदेश किसान कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि जब तक प्रदेश के अंतिम किसान का अंतिम दाना नहीं खरीदा जाता, तब तक उनका यह संघर्ष जारी रहेगा।

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