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सर्पदंश मुआवजा घोटाले की जांच में लगातार नए खुलासे.. फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार.राशि दिलाने तक सरकंडा पुलिस की बड़ी कार्रवाई..एसडीएम कार्यालय से लेकर तहसील कार्यालय तक कर्मचारी गिरफ्तार

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ जिले के बिलासपुर में करोड़ों रुपये के कथित सर्पदंश मुआवजा घोटाले की जांच लगातार नए खुलासे कर रही है। फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार कर सरकारी सहायता राशि दिलाने के मामले में सरकंडा पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एसडीएम कार्यालय और तहसील कार्यालय के तीन कर्मचारियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। अदालत के आदेश पर तीनों आरोपितों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।

गिरफ्तार आरोपितों में एसडीएम कार्यालय के बाबू नरेंद्र कौशिक, गरीब राम बिंझवार और तहसील कार्यालय के क्लर्क हरिशंकर राठौर शामिल हैं। पुलिस के अनुसार इन तीनों ने फर्जी प्रकरण तैयार कर सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर की और शासन से मिलने वाली चार-चार लाख रुपये की सहायता राशि स्वीकृत कराई।

आत्महत्या के केस को बना दिया सर्पदंश का मामला
सरकंडा थाना प्रभारी प्रदीप आर्य के मुताबिक, जांच के दौरान एक चौंकाने वाला मामला सामने आया, जिसमें एक व्यक्ति ने फांसी लगाकर आत्महत्या की थी। पुलिस ने उस समय मर्ग कायम कर पोस्टमार्टम कराया था। बाद में उसी मर्ग नंबर का दुरुपयोग करते हुए फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार की गई और मौत का कारण सर्पदंश दर्शाकर मुआवजा प्राप्त कर लिया गया। इस फर्जीवाड़े में तहसील और एसडीएम कार्यालय के कर्मचारियों की भूमिका सामने आने पर उन्हें गिरफ्तार किया गया।
कई डॉक्टर और अधिकारी जांच के घेरे में
एसएसपी रजनेश सिंह की निगरानी में चल रही जांच में अब सिम्स सहित अन्य स्वास्थ्य संस्थानों के कई डॉक्टरों और राजस्व विभाग के अधिकारियों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद इस बहुचर्चित घोटाले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
2025 में सामने आया था पहला मामला
फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट का पहला मामला वर्ष 2025 में बिल्हा थाना क्षेत्र से सामने आया था। उस समय जहर खाने से हुई मौत को सर्पदंश बताकर फर्जी रिपोर्ट तैयार की गई थी। उसी जांच से शुरू हुई कार्रवाई अब 17 करोड़ रुपये से अधिक के कथित मुआवजा घोटाले तक पहुंच चुकी है और इसकी परतें लगातार खुल रही हैं।